गुस्से मे इन्सान को खुद पे कन्ट्रोल ही नही होता

वो गुस्से मे किससे क्या बोल रहा है

ये भी भूल जाता है,

ये गुस्सा एक पल के लिए आता है,

पर आकर बहुत कुछ तबाह कर जाता है,

इसकी प्रवृत्ति ऐसी है कि

ये मनुष्य को आगे नही बढ़ने देती

बल्कि उसे अपने आप मे समा लेती है ।