ये कलयुग है जनाबयहाँ कोई किसी के लिए नहीं जीता,यहाँ कोई किसी की फिक्र नहीं करता,यहाँ कोई किसी की तारीफ नहीं करता ।
ये कलयुग है जनाबयहाँ कोई किसी के लिए नहीं जीता,
यहाँ कोई किसी की फिक्र नहीं करता,यहाँ कोई किसी की तारीफ नहीं करता ।