क्या कहूँ तुमसे और कैसे कहूँ मैं,
कि तेरे यूं मेरे नजदीक आने भर से मेरी
साँसे थम सी जाती है,
दिल बेचैन हो उठता है,
दिमाग काम करना बंद कर देता है,
बस हरकत करती है तो ये आँखे
जो जी भरके बस तुम्हे ही देखना चाहती है,
तुम्हारा स्पर्श जो मेरे दिल तक छू जाते है,
तुम्हारी बातें मानो कोई धुन बज हो सुरीली सी
और मैं उसे सुनता रहूँ
दिल बस यही तो चाहता है ।


