आजकल अपनो ने ही अपने बीच एक दीवार सी

खड़ी कर दी है, 

सोच की दीवार 

और इस दीवार को कैसे तोड़ा जाए समझ नहीं आता, 

वो हमारे सोच से मेल नहीं खाते और हम उनके,

एक तरीका है भी तो वो अपना ही नहीं पाते ।