अमन एक दिलफेंक आशिक है । उसकी ये आशिक मिजाजी बचपन से जुड़ी एक किस्से से है। बचपन में उसका पहला प्यार उससे बिछड़ गया । बिछड़ने की वजह से ही वो ऐसा हो गया । उसके बाद से वो हर लड़कियो के साथ फ्लर्ट करने लगा । जैसे जैसे वो बड़ा होता गया उसका विहेवियर चेंज होने लगा। वो नए दोस्त बनाता और कुछ ही दिन बाद उनसे बोर होकर फिर नए दोस्त तलाशने लगता । वो गाता बहुत अच्छा था । उसके गाने सुनकर लोग उसके कायल हो जाते थे। पर वो लोगो से दूर भागता था । भीड़ में रहना उसे पसंद ही नही था। उसे ऐसा लगता था कि भीड़ मे तो जैसे वो खुद को खो देगा । वो अपनी अलग पहचान बनाना चाहता था । लोगो की सोच से परे उसकी सोच थी ।
वो जहां भी गया जिन्हें भी अपना दोस्त बनाया उनमे वो अपने पहले प्यार को ही तलाशता । धीरे - धीरे वो समझने लगा कि जो खो गया है वो लौटकर कभी नहीं आयेगा ।उसने अब उसे लोगो मे तलाशना छोड़ दिया । अब वो ऐसा इश्क तलाशने निकला जो सिर्फ उसके लिए हो, अनकंडीशनल , पोजेसिवनेस से भरा । एक ऐसा साथी जो उसके लिए मरे और वो उसपे मरे । कहे तो सच्चा प्यार की तलाश शुरू की अमन ने । अब वो उस सच्चे साथी की तलाश मे दर-दर भटकने लगा । कुछ नए दोस्त बने भी तो उन्होने धोखे ही दिये । वो टूट गया । वो सोच रहा था - "क्या इस दुनिया मे सच्चा प्यार तलाशना इतना मुश्किल है?
क्या कोई यहाँ किसी से सच्चा प्यार भी नही करता!"
कहा गया है न जब किसी चीज को आप सिद्धत से चाहो तो पूरी कायनात उसे आप से मिलाने की साजिश करती है । कुछ ऐसी ही साजिश कायनात ने अमन के साथ भी की ।
एक दिन उसकी जिंदगी मे ऐसी घटपा घटी जो उसे उसके मंजिल के करीब ले गयी। उसे जैसी साथी की तलाश थी वो मिल गयी।
वो लड़की अमन पे मरती थी और अमन उसपे मरता था । दोनो एकदूसरे से बेहद प्यार करते थे उसने देर नही कि । दोनो विवाह के पावन बंधन मे बंध गए। दोनो के सुखी जीवन के कुछ महीने ही बीते थे कि पता नहीं दोनो की जोड़ी को किसकी नजर लग गई । शायद भगवान को भी ये मंजूर नही था उनसे इनकी खुशियां देखी नही गई और एक दिन वो एकदूसरे से जुदा हो गए ।
एक एक्सीडेंट मे संजना अपनी याददाश्त खो देती है । वो अमन को भूल गई । उसने अमन को पहचाना ही नही । जब वो थोड़ी ठीक हो गई तो अमन उसे घर ले जाने आया लेकिन संजना ने उसके साथ जाने से इंकार कर दिया । संजना के मम्मी पापा उसे अपने साथ ले गये । अमन रोता रहा, संजना को जाने से रोकता रहा पर वो नही रुकी ।
डॉक्टर ने कहा था अगर उसे याद दिलाने की कोशिश करेंगे तो उसका असर उसके मस्तिष्क पर पडे़गा और ऐसा भी हो सकता है कि अब वो उसे बचा नही पाये इसलिए संजना के मम्मी-पापा उसे अमन से दूर ले गए ।
कहते है न 'किस्मत मे जितना लिखा होता है उससे ज्यादा कुछ नही मिलता।'
संजना अमन से दूर चली गयी । संजना सब कुछ भूल गयी थी तो अब वो पहले जैसे अपनी जिंदगी को जीती थी फिर से वैसा ही सब करने लगी। उसके मम्मी-पापा उसे अमन से दूर रखने को बैंगलोर ले जाते है।
बैंगलोर मे संजना की मुलाकात रवि से होती है । वो दोनो पहले दोस्त बनते हैं फिर धीरे - धीरे दोनो एकदूसरे से प्यार करने लगते है । संजना के मम्मी-पापा जल्दी ही शादी करवा देते है । वो दोनो साथ मे बेहद खुश है । कुछ सालो बाद संजना और रवि को एक बेटा होता है । नामकरण के वक्त पंडित जी जब संजना से बच्चे का नाम पूछते है तो संजना उसका नाम अमन बताती है लोग तालियां बजाने लगते है । संजना के मम्मी-पापा एकदूसरे को देखने लगते है और सोचते है जो भी हो भले ही वो अमन को भूल गयी हो, उसके दिमाग ने अमन को भूला दिया हो मगर उसके दिल मे शायद अमन की जगह अब भी थोड़ी बची हुई थी।
संजना के जाने के बाद अमन पूरी तरह से टूट गया था मगर उसने खुद को संभाला। उसने संजना को ढूंढना शुरू किया और एक दिन उसे ढूंढते ढूंढते बैंगलोर पहुँच
गया ।
उसकी तलाश एक दिन खत्म हो गई । उसने संजना को आइसक्रीम पार्लर पर देखा । वो तो उसे देखकर पागल ही हो गया । वो बिना गाड़ियाँ देखते हुए पागलो की तरह दौड़ता सड़क पार करके संजना के पास पहुंच गया । अमन ने संजना से बात करने की कोशिश की तभी एक बच्चा संजना के गोद मे आकर बैठ गया । अब अमन कभी संजना को देख रहा था तो कभी उसके गोद मे बैठे बच्चे को । उसे कुछ भी समझ नही आ रहा था । उसने फिर से संजना से बात करने की कोशिश की पर संजना ने अमन से बात करने से इंकार कर दिया ।
संजना ने अमन से कहा - ओह हैलो मिस्टर आप जो भी हो कबसे मुझे परेशान किये जा रहे है ।
मै नही जानती आपको कि आप कौन है!
मुझे परेशान करना बंद करो वरना मै शोर कर दूंगी कि आप मुझे परेशान कर रहे है कबसे !
तो ये लोग आपका बुरा हाल कर देंगे इसलिए आप शांति से यहाँ से चलते बनिए ।
अमन संजना को पैनिक होता देखकर बोला वो लोग बहुत अच्छे दोस्त थे । क्या तुम्हे कुछ भी याद नही फिर उसने संजना को कुछ बाते उसके बारे मे बताया जिससे संजना को यकीन हो जाए कि वो सच बोल रहा है और वो दोनो दोस्त थे कभी । संजना ये सब सुनकर बात करने को राजी हो जाती है।
अमन हरसंभव कोशिश करता है संजना को याद दिलाने की पर उसे कुछ भी याद नही आता ।
फिर उसका ध्यान संजना के गोद मे बैठे बच्चे की ओर जाता है वो संजना से पूछता है ये बच्चा कौन है?
संजना कहती है - ये मेरा बेटा है अमन ।
अमन भौचक्का होकर संजना को देखने लगता है।
अमन ने संजना से पूछा- तुमने शादी कब की?
तो संजना ने उसे सारी घटना बता दी जो इतने वर्षों मे घटी थी । वो लोग कुछ देर तक बाते करते रहे । संजना अमन को बाय बोलकर जाने लगी । अमन उसे जाते हुए देखता रहा । वो कभी संजना को देखता तो कभी गोद मे लिए अमन को ।
अमन मन ही मन ये सोचकर खुश हो रहा था कि " उसके दिल मे अब भी मैं हूँ तभी तो उसने अपने बेटे का नाम भी अमन ही रखा है ।
उस मुलाकात के बाद वो फिर कभी नही मिले ।
कुछ साल और बित गए संजना के इंतजार मे पर संजना नही लौटी । वो उसका इंतजार करता रहा ।
फिर वो भी बैंगलोर मे ही सेटल हो गया और अब वो एक होटल मे गाना गाता है। दर्द भरे गीत तो कभी नगमे वो गाता है । वो अक्सर एक गाना गाता है जो लोगो को बेहद पसंद भी आता है।
तुझे भूलना तो चाहा
लेकिन भूला ना पाये
जितना भूलाना चाहा
तुम उतना याद आये।


