जब भी बादलों को देखता हूँ मन में यही ख्याल आता है,
एक दिन इन बादलों के पार जाकर देखूँगा जरूर
इसके पार आखिर है क्या!
ये बारिश की बूँदे बादलों के पार से कहाँ से आता है
देखूँगा जरूर ,
क्या इश्वर सच में बादलो के पार रहते हैं या नहीं देखूँगा जरूर, बचपन में जो परियों की कहानियाँ सुनता था क्या सच में वो परियां बादलो के पार रहती है देखूँगा जरूर ।


