शान और मिष्टी एक ही स्कूल में साथ पढ़ते है । शान एक शर्मिला सा लड़का है। स्कूल में उसके कम ही दोस्त है । मिष्टी एकदम धाकड़ लड़की है और उसके बहुत सारे दोस्त है । उसके दो जिगरी दोस्त है सपना और रोहन। वो अक्सर इन्हीं लोगो के साथ होती है ।
एकदिन क्लास के कुछ बच्चे शान को धक्का देकर नीचे गिरा देते है और उसपे हंसने लगते है तभी मिष्टी वहां से गुजरती है भीड़ देखकर वो वहां आती है जैसे ही लड़के मिष्टी को आते देखते है वो लोग वहां से भाग जाते है । मिष्टी शान के नजदीक पहुंचती है उसे उठाने के लिए अपना हाथ आगे कर देती है। शान बेहद डरा हुआ था । उसने अपनी आँखे भी बंद कर लिया था उसने मिष्टी के हाथो को देखा ही नहीं।
मिष्टी ने उसे आवाज लगाई - ओ हैलो यहीं पे पड़े रहना है या उठोगे भी। शान अपनी आँखे खोलता है अपने सामने उसे वही धाकड़ लड़की नजर आती है जिससे स्कूल के सारे बच्चे डरते है ये शान और मिष्टी की पहली मुलाकात थी ।
शान नया नया स्कूल में आया था उसने बस मिष्टी के बारे में सुना ही था और आज उसने उसे देख भी लिया। शान मिष्टी का हाथ थाम लेता है और उठ जाता है ।
मिष्टी शान से पूछती है - क्या हुआ था ?
ये लोग तुम्हे क्यों परेशान कर रहे थे ?
शान बोला - ये लोग हमेशा मुझे ऐसे ही परेशान करते है।
तो मिष्टी शान से कहती है अगली बार ये ऐसा करें तो तुम मुझे बताना मैं इनकी खबर लेती हूँ और ये कहकर मिष्टी चली गई । शान उसे जाते हुए देखने लगा हवाएं चलने लगी गिटार बजने लगे । शान अभी सपनो मे खोया ही था कि घंटी बजी वो सपने से बाहर आ गया ।
अगले दिन से वो स्कूल जल्दी जाने लगा । अब वो वहां बैठता जहां से वो मिष्टी को देख सके । मिष्टी अक्सर पहले बेंच पे ही अपने दोस्तो के साथ बैठती थी। अब शान को किसी से डर नहीं लगता था और वो हमेशा स्कूल भी आने लगा था । अब वो उन लड़को को जब देखता तो कहता- मुझे परेशान करके दिखाओ पर वो लड़के मिष्टी से डरते थे इसलिए अब वो शान को तंग नही करते थे ।
एक दिन शान जब मिष्टी को देख रहा था तो सपना की नजर शान पर पड़ी । उसने शान को मिष्टी की ओर देखते हुए पकड़ लिया । शान की नजर जब सपना से टकराई तो उसने अपनी नजर बोर्ड पर टिका दिया। अब अक्सर सपना उसे मिष्टी को देखते हुए पकड़ लेती और शान अपनी आँखे इधर उधर करके बोर्ड की ओर देखने का बहाना करने लगता ।
एकदिन मिष्टी स्कूल नहीं आई । शान उदास हो गया । उसका मन ही नहीं लग रहा था स्कूल में । तभी सपना शान के साथ आकर बैठ गयी ।
उसने बैठते ही शान से कहा - 'क्या मजनू आज उदास क्यों हो?'
'मिष्टी की याद आ रही है क्या!'
संभालो खुद को मिष्टी अपने किसी रिश्तेदार के यहां शादी मे गयी है और 2-3 दिन बाद ही लौटेगी ।
कुछ दिन बाद जब मिष्टी वापस आ गयी तो सपना ने उसे सब बता दिया । आज शान स्कूल बेमन सा जा रहा था । क्लास मे आते ही उसकी नजर मिष्टी पे पड़ी उसे देखते ही वो खुश हो गया । वो जाकर अपनी सीट पर बैठ गया । उसने देखा आज मिष्टी भी बार बार पलटकर उसकी ओर ही देख रही थी । छुट्टी में जब वो लोग अपनी साईकल से निकले तो रास्ते मे मिष्टी से एक लड़का जानबूझकर टकरा गया और उससे बहस करने लगा।
उसने जाते जाते मिष्टी से कहा - 'देखना मै इसका बदला तुमसे कैसे लेता हूँ ' और वो चला गया ।
शान पीछे ही था वो सब देख रहा था पर उसने कुछ नही कहा । उसे तो पता ही था कि मिष्टी सब संभाल लेगी । सब चले गए । वो भी जाने लगा । अभी कुछ दूर गया ही था कि उसे वो धमकी याद आ गयी । उसने अपनी साईकल मोड़ी और मिष्टी के घर की ओर तेज तेज कदमो से साईकल चलाने लगा । मिष्टी और उसके दोस्त अभी थोड़ी दूर ही गए थे । शान ने उसको देख लिया । अब वो धीरे-धीरे साईकल चलाने लगा । तभी आगे जाकर सपना के साईकल की चैन उतर गयी । सपना को चैन चढाना नहीं आता था । मिष्टी उसकी मदद करने उसके पास आ गयी । सपना ने देखा शान को इधर ही आते हुए ।
शान सोचने लगा अब मैं क्या करूंगा आगे बढ़ जाता हूँ ।
तभी सपना ने उसे आवाज लगाई और मिष्टी के कानो में कहा - तेरा डरपोक आशिक पीछा कर रहा है लगता है आज घर छोड़कर ही जायेगा । शान तब तक वहाँ पहुंच गया । सपना ने शान से पूछा- तुम इधर क्या कर रहे हो ?
शान क्या बोलता उसने झूठ बोला - मैं अपने अंकल के घर जा रहा हूँ ।
तब तक मिष्टी ने चैन लगा दिया । अब सब साथ ही जा रहे थे । सपना का घर आ गया और वो चली गई । थोड़ी दूर जाने के बाद रोहन का घर आ गया वो भी चला गया । अब शान और मिष्टी अकेले थे पहली बार । दोनो साथ चल तो रहे थे पर बोल कोई नही रहा था । मिष्टी का भी घर आ गया तो उसने शान से पूछा - तुम्हारे अंकल का घर कहां है?
अब जब कोई अंकल है ही नहीं तो उनका पता कहां से बताता शान सोचने लगा । उसने कहा आगे है मिष्टी उसकी ओर देखने लगी और उसने शान से कहा - 'आगे कोई घर नहीं है वहां से नदी बहती है।'
क्या तुम्हारे अंकल नदी किनारे रहते है!
अब शान क्या कहता ।
उसने कहा - 'मैं तो पता ही भूल गया अंकल के घर का, शायद उनका घर इस गली के दूसरे छोर पर है।'
मिष्टी ने शान से पूछा - मैं छोड़ दूं तुम्हे वहां ।
शान ने ना में अपना सर हिलाया और मिष्टी हंसते हुए
बाय-बाय कह के घर में चली गई । शान कुछ देर तक मिष्टी के घर के बाहर ही खड़ा रहा जब उसे ये तसल्ली हो गई कि कोई नही है तो वो चला गया । मिष्टी खिड़की से सब देख रही थी । शान के जाने के बाद मिष्टी ने बहुत सोचा ।
क्लास के एग्जाम्स भी खत्म हो गए थे । आज रिजल्ट आनेवाला था । जब सभी अपने अपने रिजल्ट देख लेते है तॅ शान ये सोचने लगता है अब आगे की पढ़ाई मैं मिष्टी के साथ कर पाऊंगा या नहीं । वो ख्यालो मे ही गुम था कि मिष्टी शान के पास आती है । वो शान से बात करना चाहती है ।
इससे पहले शान उससे पूछता है - ' मिष्टी तुम आगे की पढ़ाई कहां से करोगी ।
मिष्टी शरारती लहजे में कहती है तुम्हे क्यों जानना है !
ये सुनकर शान दुखी हो जाता है और वो जाने लगता है ।मिष्टी शान को रोकती है और कहती है अरे मैं तो मजाक कर रही थी।
मैं आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली जा रही हूँ और तुम ।
शान बोला - मैं भी ।
मिष्टी भी शान को चाहने लगी थी पर वो चाहती थी कि शान पहल करे मगर शाआन कुछ नहीं कहता है और चला जाता है ।
अब उनकी मुलाकात दिल्ली के एक कॉलेज मे होती है दोनो के विषय समान होते है इसलिए अब वो दोनो साथ साथ कॉलेज आते-जाते है साथ साथ पढ़ते है । अब वो दोनो अच्छे दोस्त बन गए है ।
शान इस बात से डरता था अगर वो मिष्टी को प्रपोज करेगा और वो 'ना' कह देगी तो वो क्या करेगा ?
इस डर से उसने मिष्टी को प्रपोज ही नही किया ।
उनकी पढ़ाई पूरी हो गई और किस्मत का खेल देखिए दोनो की जॉब एक ही कम्पनी में हो गई।
मिष्टी शान से सीनियर पोस्ट पर थी । अब मिष्टी हर वक्त काम मे उलझी रहती । उसे काम मे उलझा देखकर शान भी उसके पास कम ही जाने लगा पर दिल मे अब भी प्यार था ही साथ मे वो डर भी ।
कम्पनी मे एक नया बॉस आता है मोहित शर्मा । अब तो मिष्टी शान से और दूर लगी । काम का प्रेशर बढ़ गया ।
एक दिन अचानक मोहित मिष्टी के डेस्क पे जाता है और उसे साथ में लंच के लिए पूछता है ।
मिष्टी ना नही बोल पाती । वो बॉस को नाराज नहीं नहीं करना चाहती है । अब आए दिन मिष्टी और मोहित कभी लंच तो कभी कॉफी के बहाने मिल ही लेते । दोनो मे
अच्छी-खासी दोस्ती हो गई । शान ये सब देखकर जल रहा था पर कुछ कर नही पा रहा था ।
एक दिन ऑफिस के कैंटीन मे जब वो दोनो को साथ मे कॉफी पीते हुए देखता है तो वो गुस्से मे लाल पीला हो जाता है । ऑफिस बॉय ये देखकर सब समझ जाता है । वो शान के पास जाकर कहता है - सर आप बस देखते रह जाइयेगा कोई और उसे भगा ले जायेगा ।
वो घर आने के बाद आज बड़ी देर तक सोचता रहा अब जो हो जाए मै मिष्टी को प्रपोज करके रहूंगा । वो आईने के सामने जाकर रिहर्सल करने लगा । अगले दिन रविवार था । उसने मिलने के लिए मिष्टी को एक रेस्ट्रा मे बुलाया ।
रेस्ट्रा के एक टेबल को बहुत अच्छी तरह से सजाया और वही बैठकर मिष्टी का इंतजार करने लगा । कुछ देर बाद मिष्टी आते हुए दिखाई दी वो खुश हो गया और ये क्या उसके पीछे पीछे मोहित भी आ रहा था |
उसने आते ही मिष्टी के लिए कुर्सी खींची और पास से एक कुर्सी लेकर मिष्टी के पास ही बैठ गया ।
शान सोचने लगा जो मुझे करना था वो ये मोहित क्यों कर रहा है और ये यहां आया क्यों है!
मोहित बैठते ही शान से पूछता है -
'क्या बात है
आज कुछ खास है क्या
तुम्हारा बर्थडे है क्या
टेबल को इतना क्यो सजाया है?
शान उसकी बातों को बीच में ही काटते हुए मिष्टी से पूछता है - ये तुम्हारे साथ क्यो आया है?
मोहित इसका जवाब देता है - आज जब तुमने मिष्टी से यहां आने को कहा था तो मै भी वही भा हमारा भी प्लान कही बाहर जाने का था पर तुम्हारा प्लान बेहतर लगा तो हमदोनो यहीं आ गए ।
तभी वेटर मेन्यू कार्ड ले आया और ये क्या मिष्टी के खाने का ऑर्डर भी मोहित दे रहा था । शान को बेहद गुस्सा आ
गया । जब मोहित ने उससे पूछा तुम क्या खाओगे तो उसने उससे कहा - तुम ही कुछ ऑर्डर कर दो और ये कहकर वो वाॅसरुम मे चला कर गया । गुस्से से उसका चेहरा तमतमा रहा था उसने एक जोरदार मुक्का दीवार पर मारा और फिर दर्द से कराहने लगा । वो खुद को आईने मे देखकर खुद ही से बाते करने लगा - मै इस मोहित के सामने मिष्टी को कैसे प्रपोज करू , पता नही ये मिष्टी के पीछे क्यो पड़ा है हमारा पीछा कयो नही छोड़ता । अच्छा आज रहने देता हूँ फिर कभी मिष्टी को प्रपोज कर दूंगा और वो ये सोचकर बाहर जाने लगा ।
तभी एक अंकल ने उसे आवाज दी अरे बेटा जरा रुको ।
वो रूक गया ।
अंकल उसके पास आकर बोले - ये तुम क्या करने जा रहे हो अच्छे काम के लिए देर नही करनी चाहिए और प्रपोज करने के लिए तो बिल्कुल भी नही । मैंने तुम्हारी सारी बाते सुनी है तुम बाहर जाओ और उसे आज, अभी ही प्रपोज कर दो । उन्होंने शान को हिम्मत दी और उसका हौसला बढ़ाया।
शान बाहर आया । उसने देखा खाना टेबल पर आ गया था और वो मेरा इंतजार किये बिना खाना शुरू भी कर चुके थे । उसने इन बातो को नजरअंदाज किया और खुद मन ही मन रिलैक्स करने लगा । फिर उसने वेटर को इशारा किया स्पॉटलाइट शान पे पड़ी और बैकग्राउंड मे हल्की सी म्यूजिक बजने लगी ।
शान मिष्टी के पास गया और अपने घुटनो पर बैठ गया ।
शान ने मिष्टी को प्रपोज कर दिया ।
उसने मिष्टी से कहा - मिष्टी मै तुम्हे बचपन से चाहता हूँ जब मैंने पहली बार देखा था तब से ही, पर डरता था इजहार करने से कि तुम ना न कह दो पर अब मै तुम्हारे बिना नही रह सकता, तुम्हे किसी और के करीब जाते नही देख
सकता । मै इस खूबसूरत से दोस्ती के सफर को और आगे तक ले जाना चाहता हूँ ।
I Love You Misti
Will You Marry Me
और वो मिष्टी के आगे एक रिंग कर देता है ।
मिष्टी कुर्सी से उठ जाती है और हां कह देती है ।
शान रिंग मिष्टी को पहना देता है । रेस्ट्रा के सभी लोग तालिया बजाने लगते है। मिष्टी शान के गले लग जाती है और कहती है तुमने कितनी देर लगा दी कहने मे । मै कब से इस पर का इंतजार कर रही थी । मुझे तो लगा था कि तुम कभी मुझे प्रपोज करोगे ही नहीं । मैंने प्लान बनाया था कि अगर तुम मुझे प्रपोज नही करोगे तो 14 Feb को मै खुद ही तुम्हे प्रपोज कर देती पर तुमने कर दिखाया मेरे डरपोक आशिक ।
पता है जब तुम उस दिन मुझे घर तक छोड़ने आये थे और मेरे अंदर आ जाने के बाद भी तुम वही थे मैंने सब देखा
था । तुम्हारी फिक्र और प्यार को मै उसी दिन समझ गयी थी और मुझे भी उस पल से तुमसे प्यार हो गया था ।
चलो शुक्र है देर से ही सही तुम्हे अक्ल तो आयी ये कहकर मिष्टी हंसने लगी शान भी मुस्कुरा दिया। मोहित भी हंसने
लगा ।
वो शान के पास आकर बोला - भाई मैं तुम्हारे लिए बेहद खुश हूँ और ये कहकर उसने शान को गले लगा लिया । वो लोग फिर बैठ गए ।
अब मोहित ने कहना शुरू किया – भाई तुम इतने दिन से जल रहे थे पर ये सब प्लान किया गया था ।
मैं रोहन का बड़ा भाई हूँ उसने मुझे तुम दोनो के बारे मे सारी बाते बता दी थी । रोहन और मैंने प्लान बनाया तुम्हे जैलेस करवाने का और तुम हुए भी । हमारा प्लान काम कर गया और रिजल्ट सामने है।
मोहित हंसने लगा उसे हंसता देख शान और मिष्टी भी हंस पड़े ।
बैकग्राउंड मे म्यूजिक थोड़े जोड़ से बजने लगा ।


