दर-बदर सी है जिंदगी
कभी यहां तो कभी वहां
कभी खुद की तलाश करती है
कभी गैरों में खुद को ढूंढती है
चाहती है ये क्या
खुद नहीं समझती है ।


दर-बदर सी है जिंदगी
कभी यहां तो कभी वहां
कभी खुद की तलाश करती है
कभी गैरों में खुद को ढूंढती है
चाहती है ये क्या
खुद नहीं समझती है ।