दिलो मे बढती दूरियो को कैसे मैं मिटाऊ
मन मे चल रही कड़वाहट को कैसे मैं छुपाऊ
उन झूठी खोखली वादो को कैसे मैं निभाऊ
मन मे उठ रहे हलचल से खुद को कैसे मैं समझाऊ
रूठ गया हूँ खुद से ही कैसे मैं मनाऊ
जो बीत रहा है मुझ पे वो कैसे मैं बताऊ ।


दिलो मे बढती दूरियो को कैसे मैं मिटाऊ
मन मे चल रही कड़वाहट को कैसे मैं छुपाऊ
उन झूठी खोखली वादो को कैसे मैं निभाऊ
मन मे उठ रहे हलचल से खुद को कैसे मैं समझाऊ
रूठ गया हूँ खुद से ही कैसे मैं मनाऊ
जो बीत रहा है मुझ पे वो कैसे मैं बताऊ ।