आपन माटी आपन शान
केकरो के नाहि तु करीह गुणगान
जन धन सब रहे खुशहाल,
मजदूरी करके तु करीह अपन जीवन गुजर-बसर,
केहू और पर न रहीह तु निभर,
करीह तु अपन जीवन मे बहोते ही काम
न रूकीह न डरीह तु चलत ही रहीह,
करीह अपन ऊँच तु नाम
आपन माटी आपन शान ।

आपन माटी आपन शान
केकरो के नाहि तु करीह गुणगान
जन धन सब रहे खुशहाल,
मजदूरी करके तु करीह अपन जीवन गुजर-बसर,
केहू और पर न रहीह तु निभर,
करीह तु अपन जीवन मे बहोते ही काम
न रूकीह न डरीह तु चलत ही रहीह,
करीह अपन ऊँच तु नाम
आपन माटी आपन शान ।