जब पहली बार मैंने तुम्हे देखा था अंधेरी रात में,
तुम पूर्णमासी की चाँद सी दिखी थी,
जैसे जैसे रात गहरी होती जा रही थी,
तुम और निखरती जा रही थी,
मंद मंद मेरे दिल में उतरती जा रही थी ।


जब पहली बार मैंने तुम्हे देखा था अंधेरी रात में,
तुम पूर्णमासी की चाँद सी दिखी थी,
जैसे जैसे रात गहरी होती जा रही थी,
तुम और निखरती जा रही थी,
मंद मंद मेरे दिल में उतरती जा रही थी ।