इंसान भी कितना अजीब होता है,

जो व्यक्ति उसके पीठ पीछे शिकायते

करने से थकता नही है,

वो उसके सामने उसके असल चेहरे को

जानते समझते हुए भी उससे अच्छे से बात करता है,

उसके साथ हंसता बोलता है,

कमाल है ये जानते हुए भी कि

वो व्यक्ति आपके बारे मे क्या राय देता है,

फिर भी उसके साथ अच्छे से पेश आना

एक अभिनय ही तो है,

और ये अभिनय इंसान अक्सर बखूबी

से निभाता है,

उसके कहे गए शब्दो , उसके किये गए

कार्यो को नजरअंदाज करता है,

यही तो असल अभिनय है जिनमे

अपने दिल के दर्द को दिल में ही

दबा लेना होता है,

अपने गम को चेहरे से छुपा लेना होता है