अपने पिता के कांधे के बोझ को मुझे कम करना है,

इन बेफजूल प्यार व्यार के चक्कर से मुझे दूर रहना है,

अपने बूढ़े होते माता पिता की सेवा करना है,

बुढ़ापे का उनका सहारा बनना है,

मेरे कदमो के साथ वो हरदम है चले अब है मेरी बारी मुझे भी उनके कदम से कदम मिलाकर साथ चलना है,

उन्होंने बचपन में हाथ पकड़कर चलाना सिखाया है अब उनके हाथ पकड़कर चलाने की हमारी बारी है,

जो उनके फर्ज थे उन्होंने पूरे किए

अब फर्ज निभाने की बारी हमारी है,

अपने माता-पिता की शान बढ़ाना है,

दुनिया में अपना एक मुकाम बनाना है,

उनके पहचान से तो सभी जानते है,

अब अपनी पहचान से उनकी पहचान करवाना है,

बचपन में मेरी हर जिद को माँ पूरा करती थी अब उनके हर जिद को पूरा करने की मेरी बारी है,

माता-पिता की सारी जिम्मेदारी

उठाने की अब मेरी बारी है ।