अभी तो जानना बाकी है तुम अपनी खुशियों में मुस्कुराते कैसे हो,

अपने गमों में आंसू बहाते कैसे हो,

अभी तो कुछ बातें हैं जो तुमने हमसे कहीं नहीं,

उन बातों का बेपर्दा होना अभी बाकी है।

अभी तो वक्त सा महंगा तोफा तुमने दिया नहीं,

अभी तोफे को खर्च ना बाकी है।

अभी तो देखना बाकी है तुम अपनी रुसवाईयों में चीख़ते कैसे हो,

बेदर्द सब का हाथ था मैं हमारा हाथ थाम ते कैसे हो।

तो अभी इंतजार करते हैं,

अभी सीखते हैं सवरते हैं और देखते हैं ,

तुम्हारे साथ चलना मुमकिन होगा या नहीं।

मुमकिन होगा या नहीं।

-साची मौर्या