रोज़ सुबह जब अख़बार के पन्ने पलटती हूँ
तब
किसी न किसी पन्ने पर ये ख़बर
पढ़ने को मिल जाती है,, कि
किसी आमुक की बेटी को
दहेज़ के लोभियों ने जलाकर मार डाला
किसी की बेटी की इज़्ज़त को
राम रूपी रावण ने तार तार कर डाला
किसी अन्य की बेटी को
एक तरफ़ा प्यार में पागल किसी दीवाने ने
तेज़ाब से झुलसा डाला
तब मेरा मन उस आमुक की जगह
अपनी अजन्मी बेटी की कल्पना कर
कराहता है,,,,,और बार बार बस यही प्रशन करता है
बेटियों के लिये इस असुरक्षित समाज में
क्या मैं दे पाऊँगी
उसे एक सुरक्षित भविष्य...?
शिबली सना
इलाहाबाद
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