कविता

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कविता भूल मत करना

कभी हीर कभी लैला
कभी शीरी की आवाज़ें
मुझसे ये कहा करती हैं
सुन !  ऐ नादान लड़की
पलट आ इन राहों से
ये तेरे पैर ज़ख़्मी कर देगीं
तुझे कोई नई राह 
नहीं चलने देगी ं
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