जब हिना हाथ में लगाई है

देर तक याद तेरी आई है


फ़िर से टूटा है नींद से रिश्ता

फ़िर मुझे तेरी याद आई है


मुझसे रूठी है मेरी परछाई

उसकी चाहत कहां पे लाई है


मुझको पहचानते हैं ग़म सारे

मेरी हर ग़म से आशनाई है


फ़ैसला क्यों हुए हैं उनसे सना

क्या कमी चाहतों में आई है



शिबली सना

इलाहाबाद