तुम हो तो लगता है की मै हूं

वर्णा पौधों की इस भीड में

अंजान सा एक पेड़ हूं


मेरे होने का यकीन हो तुम

वर्णा क्या हसी और क्या सितम

साथ होता है मेरे जब लगता है सब खतम


चाहे लाख मुश्किले आए हो

तुम जीने की वजूद बन गए हो

अंधेरी रातों मे रोशनी बन के छा गए हो