सदियों से जो हो रहा है

वो बस देखती आ रही हूं

हालात ऐसे हो रहे है 

अब सह नही पा रही हूं


युगों की इस झलक मे 

सभी रंगों को देख लिया

कलियुग की घटनाओं ने 

मन विषण्णता से भर दिया


हाँगकाँग से लेके युरोप तक

अशांती का सिलसिला शुरू हुआ

जलती हुई समस्यांओं ने अब

हिंदुस्थान को भी घेर लिया


अन्याय और दर्द का बोज लेके

एक एक दिन कांट रही हूं

समस्त नारी की चींखती हुई पुकारों मे

मेरा वजूद खो रही हूं


मानवता से शुरू हुए इस संसार को

तुमने धर्म-जात मे बांट लिया

राजकीय स्वार्थ की लढाई में

कानून को भी अंधा कर दिया


हररोज की इन बवालों ने

मेरे अस्तित्व को अंधेरे मे धकेल दिया

सुरक्षा की झूठी हमदर्दी जताकर

पुरी आवाम को असुरक्षित बना दिया


हाल ही मे हो रही घटनाओं ने

ज्वलंत समस्याओं को गुमराह कर दिया

जलती हुई चिंगारीयों ने

आग को बढावा दे दिया


कोई भी कायदा करणे से पहले

जनमत का भी विचार करना

वर्णा जलती हुई चिंगारीयों से 

फैलती हुई आग देखते रेहना


“ DEMOCRACY ” के नाम पे

“ HYPOCRISY ” ना होने देना

मेरी स्वतंत्रता के लिये शहीद हुए वीरों की

कुर्बानी जरा याद रखना


“ भारत बचाओ ” के नारों से

कुछ ना होगा अब

थोडी सजगता हि दिखाना 

मे चैन की सांसे लूंगी तब


हाथों मे बंधी बेडियों से 

मे आझाद तो हो गई

पर स्वतंत्रता तभी मिलेगी

जब किसी को ना लढनी पडे अपने अस्तित्व की लढाई


एक भारतीय होने का अफसौस

कभी किसी को ना होना

अभिमान की ज्योत को

कभी बुझने ना देना



-भारत माता