नफरतों तुम कब तक जिन्दा रहोगी
सुना है हर किसी की उम्र तय होती है 
दूरियों तुम कब फासला कम करोगी
नजदीकियों में जिंदगी बसर होती है 
वक्त तेरी तल्ख़ चाल कब  बदलेगी
मुस्कराहट तेरी गोद में ही पलती हैं
जिंदगी तुम मुझसे कब बात करोगी
मौत हाथ थामने की बात करती है
शैलेंद्र शुक्ला"हलदौना"