झटपटाहट तो जिस्मों की भाषा है
इश्क में तो सिर्फ खामोशी होती है!!
मुहिब कहता कहां है जुबां से कुछ
सरगोशी सिर्फ आंखों से होती है !!
रूठना मनाना शेफ़्ता की अदा है
त'अश्शुक़ में सिर्फ पर्दा-पोशी होती है!!
शैलेंद्र शुक्ला"हलदौना"
शेफ़्ता ~ चाहने वाला
त'अश्शुक़ में ~प्यार में
मुहिब ~lover,आशिक
पर्दा-पोशी ~ गलतियों को अनदेखा करना

