अभी सपने भी नही बुने थे
तूने बिछड़ने की बात कह दी!!
तुझसे करूं नफरत कैसे
कोई वजह ही तूने नही दी !!
थोड़ा जिंदगी संवरने तो देती
तुमने बिखरने शुरआत कर दी !!
एक कोशिश की थी मुस्कराने की
तुमने दर्द की चुभन सी भर दी !!
कोशिश बहुत की थी समिटने की
तुमने जिंदगी तार तार ही कर दी !!
रोले था में अकसर अपनी किस्मत पर
तूने अब चुप रहने की शर्त रख दी !!
मुझको नही मालूम में कब मिला था खुद से
तूने मुझ पर ही मेरी पहराबंदी कर दी !!
शैलेंद्र शुक्ला " हलदौना"


