कफस में भी होने लगी है मुसर्रतइश्क जो मुझको इक अहेरी से हैखौफ भी मुझको देखकर है हैरानमेरा यकीन भी उस काफिर में हैजानता हूं कुछ हासिल ना होगा मुझेहाथ मेरा फिर भी उसके हाथों में है
कफस में भी होने लगी है मुसर्रतइश्क जो मुझको इक अहेरी से है
खौफ भी मुझको देखकर है हैरानमेरा यकीन भी उस काफिर में है
जानता हूं कुछ हासिल ना होगा मुझेहाथ मेरा फिर भी उसके हाथों में है