आज में अचानक से खुद से मिला
थोड़ा डरा सहमा सिकुड़ा सा था खड़ा !!
पूछा बचपन में कहां खो गए थे तुम
मैंने जवानी तक है बहुत ढूंढा तुम्हें
पर तुम हो कि कभी मिलते ही नही
मुझे देखो में कितना बड़ा सा हो गया
दुनिया की सारी चालाकी भी सीख गया!!
तुम हो कि बिलकुल नहीं हो बदले
उसी बचपना में अभी भी हो उलझे !!
चलो अब कुछ अपनों की बात हैं करते
वो चाचा ताऊ भाई बहन सब अलग हैं रहते
जिनके साथ बचपन में तुम साथ खाना थे खाते
अब मां बाप का भी बटवारां है कर लिया
मां मैंने ले ली पिताजी को भैया को दे दिया !!
हां जीवन थोड़ा सा कठिन जरूर हो गया
पहले बेफिक्र थे दुनिया की दुनियादारी से
अब वक्त ही नही मिलता इन जिम्मेदारी से !!
चलो चलो अब चलते हैं थोड़ा लेट हो गया
बीबी को ऑफिस छोड़ने का वक्त हो गया !!
शैलेंद्र शुक्ला "हलदौना"
ग्रेटर नोएडा (उoप्रo)


