मौत ने ही जिंदगी को काबू है किया

वरना हर शख्स बेखौफ हो गया होता !!

मंजिल ने ही दी है ना रुकने की ताकत

वरना हर कोई सफर में ठहर गया होता!!

तेरी बेरुखी ने रोशन मयखानों को है किया

वरना पैमानों की जगह तेरा हाथ ना होता!!

उड़ान ने सिर्फ होंसलों पर किया है भरोसा 

वरना हर किसी ने आसमान छू लिया होता !!

तुझको पाने की हसरत ने रखा है जिंदा 

जो तू मिल गई होती तो मर ना गया होता!!

शैलेंद्र शुक्ला "हलदौना"