जिंदगी का तुम एतबार न करो
हिसाब आज का आज ही करो
उधार में नही तुम नकद में जियो
समय है संभलकर जरा खर्च करो
कितना किसके हिस्से में तय करो
कल के फिक्र में आज बर्बाद ना करो
गर ना कहानी उलझती ही जायेगी
मौत बिना बताए साथ ले जायेगी!!
जिंदगी का तुम एतबार न करो
हिसाब आज का आज ही करो!!
शैलेंद्र शुक्ला"हलदौना"


