गले मिल लेते है इस गले काटने के दौर में 
कुछ दूर साथ चल लेते हैं इस भागदौड़ में

उम्मीदें बहुत बढ़ गई हैं अब एक दूसरे से 
असलियत पहचान लेते है इस भीड़भाड़ में

वक्त नहीं है अब तो अपने आप के लिए
चल बाहर निकलते हैं इस घोड़-दौड़ में

शैलेंद्र शुक्ला "हलदौना"