सरहदें


सोहत को कुछ कहां " लेकिन उसके दिन 20 गुज़र चुके है , सुनने में आया है वह अब उच्च तालीम ले रही है और मैं यहां भंगार गलाने का काम कर रहा हूं

वैसे भी 6 आना कि कमाई मेरे लिए बहुत कुछ है ।


रोज दिन बस दिन अब्बू के साथ काम और रात को अनंत तक अकेलापन 

"

कभीं कभी मुझे खुद को लगता है कि में कितना बेबस- लाचार हूँ ।

भंगार गलाने का काम आसान नहीं है तपती भट्टी की हवा आंखें निचोड़ लेती है हाथ और चेहरा ऐसे हो गया है जैसे किसी ने सरकारी स्टाम्प की छाप छोड़ी हो ।


लेकिन फिर भी मैने बहुत से दोस्त बना लिए है जो एक टाइम बाद स्वतः चले जाएंगे । भट्टी के मालिक रउफ चाचा की कुल 8 भट्टियां ओर 80 घोड़े है आप उनकी अमीरियत का अंदाज़ा लगा सकते है ।

मैंने इन कुछ शलोमी भंगार गलाने के साथ कुछ और धन्धो में भी काम किया लेकिन 13 घण्टे काम करने के बाद ऐसा लगता है कि मेरे किये क्या ईद हो और क्या दिवाली ?


©शेखऱ