
सरहदें
सोहत को कुछ कहां " लेकिन उसके दिन 20 गुज़र चुके है , सुनने में आया है वह अब उच्च तालीम ले रही है और मैं यहां भंगार गलाने का काम कर रहा हूं
वैसे भी 6 आना कि कमाई मेरे लिए बहुत कुछ है ।
रोज दिन बस दिन अब्बू के साथ काम और रात को अनंत तक अकेलापन
"
कभीं कभी मुझे खुद को लगता है कि में कितना बेबस- लाचार हूँ ।
भंगार गलाने का काम आसान नहीं है तपती भट्टी की
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