माज़ी को टटोला कई पतझड़ पुराने निकले

कई सूखे रिश्ते और मुरझाये फ़रिश्ते निकले

कल शाम वक़्त ने थमाई थी माचिस हमको

और आज हम खुद माज़ी को जलाने निकले

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