तोड़ कर सभी रिश्ते खुश रखा ज़माने को


यूं लुटा दिया हमने प्यार के ख़ज़ाने को


मिल सकी न एक दिन भी चैन से उन्हें रोटी


छोड़ कर शहर अपना जो गए कमाने को



मतीन अहमद मतीन