जहां ने क्या दिया है मुझको बद्दुआ के सिवा।
हमारा कोई नहीं है यहाँ ख़ुदा के सिवा।।
सितम के सामने मजबूर हुए ऐसे 'मतीन' ।
कि कुछ भी कर ना सके सिर्फ़ इलतिज़ा के सिवा।।
मतीन अहमद 'मतीन'


जहां ने क्या दिया है मुझको बद्दुआ के सिवा।
हमारा कोई नहीं है यहाँ ख़ुदा के सिवा।।
सितम के सामने मजबूर हुए ऐसे 'मतीन' ।
कि कुछ भी कर ना सके सिर्फ़ इलतिज़ा के सिवा।।
मतीन अहमद 'मतीन'