दिल को यूं शाद कर लिया हमने।


फिर तुझे याद कर  लिया  हमने।।


तेरी उल्फ़त  से  आशना  होकर।


ख़ुद को बरबाद कर लिया हमने।।




मतीन अहमद 'मतीन'