ज़िन्दगी भी एक तमाशा है लेकिन
ये पर्दा धीरे से उठाया करो
पता है कि महफ़िल की शान हो तुम
पर यूँ न बिजलियाँ गिराया करो!
इम्तहान कब तक लोगे इस दिल का
यूँ न सितम ढाया करो
और ऐसे ही नहीं आयेंगे हम
ज़रा नवाज़िश से बुलाया करो।
जहाँ में सीखा है हमने भी बहुत कुछ
कि तुमसे कम हैं तो क्या हुआ
और समझ कर हमको दिवाना
आवारा न बताया करो!
#शीतल_स्पर्श
@sheetalsparsh