वतन के वास्ते लड़ जाए वो इंसां ही फरिश्ता है बहाया ख़ून तुम उनका न अब बेकार करना भी अनीति है बढ़ी जब भी बगावत सामने आती उठो आओ जरूरी है कि अब प्रतिकार करना भी