इन रग़ो में बस गया जो बस वही तो प्यार है
डूबकर आगे बढ़ा जो वो नहीं लाचार है।
आपसे जुड़ जाये गर भगवान मन की डोर ये
बंदगी ही ज़िन्दगी का एक प्यारा सार है।
रंग देखें हैं अजब हमने यहाँ संसार के
भक्ति है वो रंग जिसका प्रेम ही आधार है।
संग ले जाता है मुझको मैं न जानूँ रब कहाँ
उसकी जोगन बन चली अब वो मेरा संसार है।
रात देखा था उसे ख़्वाबों में है वो गा रहा
उसको मिलकर यूँ लगा सपना मेरा साकार है।
बाँध डोरी जुड़ गई उसकी मैं होकर रह गई
है पिया साग़र यहाँ अब वो मेरा घरद्वार है।