क्यों यहाँ ये आदमी बीमार है
जुल्म करना समझता अधिकार है!
नफरतों की आंधियां जब भी चलीं
इंसां ही इंसां पे करता वार है!
सूरतें हर हाल में बिगड़ी वहाँ
नौनिहालों पे जहाँ हथियार है!
आओ मिलके ढूँढे कोई रास्ता
नफरतों से दुनिया अब लाचार है!
बाँचते पैग़ाम मोहब्बत यहाँ
मुल्क मेरा शान्ति का आधार है!
देखती है आस से दुनिया इसे
देश देता योग का औजार है।