जान पर जब विकार होता है

साँस फिर साहुकार होता है


मौत से फिर यहाँ जुझा लम्हा

ज़िन्दगी पर उधार होता है


पास में बीज रोग आया जब

हाथ उसके कटार होता है


तौल ग़र शब्द ना कहे मुँह से

बोल जिव्हा का वार होता है


लड़ गये जो वतन ज़मीं ख़ातिर

फूल उन पर निसार होता है



#शीतल_स्पर्श