सावन में जब,

बारिश की बूंदें,

धरती का आलिंगन 

कर रही हैं और मौसम 

खुशगवार सा,

जान पड़ने लगा,तब

हॄदय में जमी

बर्फ सी पीड़ा,

तुम्हारा स्पर्श पाकर, 

पिघलने लगी ...

दृग भी ,आशय 

ना ,दे सके

मेरे अश्रुओं को और 

वो ,बह निकले 

निर्मल ,अविरल 

जलधार की तरह ...

प्रेम का सावन

आया है, नव पल्लव 

नई कलियाँ खिली

मन की बंजर,

भूमि पर,नव ऊर्जा का

संचार हुआ !!




#शीतलरघुवंशी