मुझे खुलकर हंस लेने दो,
जैसा मन करे, वैसा जी लेने दो.
तोड़कर अपनी जंजीरों को,
खुले आसमान में उड़ान भर लेने दो.
मुझे बच्चों की तरह खिलखिलाने दो,
हंस कर सारे गम भुलाने दो,
मिटटी में लोटने और
तालाब में छलांग लगाने दो.
शिला पर चढ़ आकाश को छू लेने दो ,
मुझे अपनी सारी सीमायें तोड़ लेने दो ,
मन में जो आये वो कर लेने दो ,
गल्तियां कर जल्दी सीख लेने दो ,
आसमान से चाँद, तारे छीन लेने दो,
पत्थरों से पानी निचोड़ लेने दो,
मुझे सिंह की तरह दहाड़ने दो,
न रोको मुझे, चिल्लाने दो.
मुझे पुण्य-पाप के फेर में न पड़ने दो,
धर्म-अधर्म की नई परिभाषायें गढ़ लेने दो,
स्थापित गलत परम्परायें पलट देने दो,
मर-मर कर नहीं, जिंदादिली से जिंदगी जी लेने दो।
अपनी मान्यताएं मुझ पर न थोपो,
शिष्टाचार के नाम पर अब न रोको,
मुझे विद्रोह कर लेने दो,
अपनी राह चुन लेने दो।
मुझे वर्जनाओं से निकल जाने दो,
मुझे अपनी नई परिधि बनाने दो,
परिंदे को न कैद करो पिंजरे में,
मुझे क्षितिज तक उड़ जाने दो।
बन जाने दो मुझे आवारा,
क्योंकि जिंदगी न मिलेगी दोबारा.
