भावों का शब्द बन निकलना ज़रूरी है

मुहब्बत है तो कहना ज़रूरी है


कुछ कदम चलना जरूरी है,

कुछ अच्छा लिखना जरूरी है,

कुछ बेहतर सोचना जरूरी है,

सोच को अमल में लाना भी जरूरी है.


तुम नहीं सोचोगे तो कोई ओर सोचेगा,

ज़िंदगी जो बन सकती थी तुम्हारी,

उसे कोई ओर सींचेगा.

इसलिए, खुद अपने लिए सोचो,

जो सोचो, उसे अमल में भी लाओ.


जिंदगी तुम्हारी है, 

इसे खुद के माकूल बनाओ.