बढ़े चलो तुम

रुको मत


रिश्तों के बाजार में

मिलकर चलो तुम

झुको मत

बढ़े चलो तुम

रुको मत


इच्छाएं सबकी सुनो

सपने कुछ अपने भी रखो

मंजिल ख़ुद अपनी चुनो

बढ़े चलो तुम

रुको मत


तोड़ दो बंदिशों की दीवारों को

छोड़ दो सपनों के सौदागरों को

खोलो पिंजरा उड़ो

बढ़े चलो तुम

रुको मत


झाँकती हैं कनखियों से

कलेजा चीरती निगाहें

आँखें उठाकर

नजरें मिलाकर

बढ़े चलो तुम

रुको मत


गूँजती हैं आवाज़ें चहुँओर

तुम्हें दबाने को

बुलंद करो आवाज़ अपनी

सिर उठाकर सामना करो

बढ़े चलो तुम

रुको मत


✍ Sheela S