मन चंचलभागता हैइन हवाओं केवेग से भी तेजन जाने कहाँ-कहाँ?मन चंचलकभी-कभीनिरंकुश-सा हो जाता हैउछलते-भागतेउलझ जाता हैन जाने कहाँ-कहाँ?मन चंचलखिन्न हो जाता हैउद्विग्न भी करता हैकभी-कभीन जाने क्यों?
मन चंचलभागता हैइन हवाओं केवेग से भी तेजन जाने कहाँ-कहाँ?
मन चंचलकभी-कभीनिरंकुश-सा हो जाता हैउछलते-भागतेउलझ जाता हैन जाने कहाँ-कहाँ?
मन चंचलखिन्न हो जाता हैउद्विग्न भी करता हैकभी-कभीन जाने क्यों?