उम्मीदों से बंधी...

कोमल कच्चे धागों-सी

ख़्वाबों की डोर !


रिश्तों में उलझी...

ज़रा अनसुलझी-सी है

ख़्वाबों की डोर !


पंछी-सी उड़ान

को आतुर...

नाज़ुक पतंग-सी

ख़्वाबों की डोर !


फूलों-सी खुशबू लिए

ज़िन्दगी से...

लगाती हौड़

ख़्वाबों की डोर !


चाँदनी चमक लिए

हौसलों की...

बुनियाद संग जुड़ी है

ख़्वाबों की डोर !


जूझती,

ज़ज्बे से भरपूर...

मंज़िल की आरज़ू लिए

ख़्वाबों की डोर !



...Sheela S✍