झूम रही हैं...
गेहूँ की कच्ची बल्लियाँ !

इठलाते हुए...
बतिया रही हैं, 
फागुन के झोंकों से !
झूम रही हैं...
गेहूँ की कच्ची बल्लियाँ !!

शरमाती-सी...
मधुर मुस्कान लिए 
किशोर कोमल कलियाँ !
झूम रही हैं....
गेहूँ की कच्ची बल्लियाँ !!

लहलहाती हैं...
टकराती ठिठोली करती
सरसाती चहकती हैं हवा से !
झूम रही हैं....
गेहूँ की कच्ची बल्लियाँ !!

हिलोरे ले रही हैं...
बदलते मौसम की
धूप-छाँव की बयार में !
झूम रही हैं....
गेहूँ की कच्ची बल्लियाँ !!

खेलती हैं...
सुकून देती हैं 
चपल-चंचल कलियाँ !
झूम रही हैं....
गेहूँ की कच्ची बल्लियाँ !!

पक रहे हैं दाने...
इतराती...पानी से 
करती हैं अठखेलियाँ !
झूम रही हैं....
गेहूँ की कच्ची बल्लियाँ !!

✍ Sheela S