अफवाहों का बाजार गर्म हैमगर बात में अब भी कुछ मर्म हैदग़ा और फ़रेब झूठ का कर्म हैयही बचा अब धर्म है
अफवाहों का बाजार गर्म हैमगर बात में अब भी कुछ मर्म है
दग़ा और फ़रेब झूठ का कर्म हैयही बचा अब धर्म है