मौका....
खुशी का हो,
या गम का...
सब कुछ बयां कर ही देते हैं
आंसू !
आंखें....
बच्चों की हो,
या बुजुर्गों की....
मगर पलकों को भिगो ही देते हैं
आंसू !
तजुर्बा....
कितना भी क्यों ना हो,
बातें छुपाने का....
मगर भावनाएं बहा ले जाते हैं
आंसू !
रोकना सभी चाहते हैं,
वक्त-बेवक्त....
मगर,
न चाहते हुए भी...
निकल ही आते हैं
आंसू !
कुछ बातें....
जो बयां नहीं कर पाती है जुब़ां
मगर,
दिल खोल कर बता देते हैं
आंसू !
सच ही है
कही-अनकही...
सब कुछ कहने को बेचैन रहते हैं
आंसू !
✍ SheelaS
