मैं बैठी थी इस इंतज़ार में, कब सूरज ढलेगा आज शाम में, मैं देखूंगी वो लालिमा, वो अध्भुत सा एक समा, ढला सूरज तब एहसास हुआ, क्या समय अपना बर्बाद किया, ढलता सूरज देख मन खुश ना हुआ, वो आसमा आज लाल ना हुआ, मेरा मन उदास हो रहा था, काला धुंआ कहि से आ रहा था, प्रदूषण ने सब बर्बाद किया, सूर्य को जैसे निराश किया, मानो सूरज आज रो रहा था, खूबसूरती खोते देख रहा था। @shayraankita #ClimateChanceKadviHawa