कुछ इस तरह वो मेरे कत्ल का सामान सजाते है।। मेहंदी भी लगाते है शूरमा भी लगते हैं।। मीलने जब वो आते हैं कुछ इस तरह आते हैं।। खुशबू कौ भी लाते हैं सहरा कौ भी लाते हैं।।। फिर बाद उसके कुछ एसी मेहफिल वो सजाते हैं।।। नज़ाकत से बडी हमको सीने से लगाते हैं।।। हम क्यों ना मरे उन पर मेहबूब ही एसा हैं।। हम दील कौ लगाते हैं वो ख्वाब सजाते हैं।।। कुछ इस तरह ए (अकील) तुम्हें उसने हैं जाना ।। मानौ के खुद तुम्हें वो अपनाना चाहते हैं।।।