तुम्हारे इस खत्त में अब वो बात नहीं,
शायद कलम में अब वो स्याही नहीं ...
तू देख मेरी नजर से मुझको को कभी,
क्यूं तेरे सिवा अब कुछ भी याद नहीं ....


तुम्हारे इस खत्त में अब वो बात नहीं,
शायद कलम में अब वो स्याही नहीं ...
तू देख मेरी नजर से मुझको को कभी,
क्यूं तेरे सिवा अब कुछ भी याद नहीं ....