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अभी ज़िद न कर,दिल-ए-बेखबर,

 के पस-ए-हुजूम-ए-सितमगरा,


अभी कौन तुझ से मिला करे,

अभी किसको फ़ुर्सते इस क़दर,


के समेट के तेरी कर्चियाँ,

अभी तेरे हक़ मे दुआ करे,


ये रिफ़ाक़तें,ये मोहब्बतें,

अभी और इनमें हैं अज़ीयतें,


उसे दुआ भी दे दिल-ए-बेखबर

 वो ख़ुश रहे ख़ुदा करे...✍


~Shaaz